बुधवार, 3 अक्तूबर 2012

सम्पूर्ण आजादी अर्थात आजादी का स्वदेशीकरण........?




यह एक विडंबना ही है की आजादी के छ: दशक पार चुकी भारतीय जनता आज भी अंग्रेजों के  द्वारा जबरन थोपी गई औपनिवेशिक प्रतीकों को अपने जर्जर कन्धों पर ढोने को मजबूर है, हमारी न्याय पालिका आज भी अंग्रेजी ढर्रे पर काम कर रही है, आज भी हमारी प्रशासनिक व्यस्था मैकाले  की परिकल्पना  को साकार करने की दिशा में सक्रीय है, जीवन के हर क्षेत्र में अंग्रेजियत इस कदर हावी हो चुकी है की आज हम चाह कर भी इन गुलामी के प्रतीकों को उखाड़ फैकने का साहस नहीं कर पा रहे हैं, हमें लगता है की  अंग्रेजी के बिना हम प्रगति  नहीं कर पाएंगे, हमें लगता है की जब तक हम  अंग्रेजियत को दिल से नहीं अपना लेते तब तक हम गवांर के गवांर ही रहेंगे, किन्तु सुखद पहलु यह है की इन सबके बावजूद भी किसी एक कोने से " सम्पूर्ण आजादी" जैसे शब्द यदा-कदा सुनने को मिल ही जाते है. " सम्पूर्ण आजादी" अर्थात अपनी संस्कृति, अपनी परम्पराएँ, अपनी न्याय पालिका, अपने कायदे-कानून, अपनी प्रसाशनिक व्यस्था, अपने तौर-तरीके, अपनी भाषा में अपनी शिक्षा, अर्थात स्वाभिमान के साथ जीना ही सही  माईनो में आजादी का अहसास है, इस अहसास को सर्वप्रथम अनुभव किया था महान वैज्ञानिक, स्वाभिमानी राष्ट्र भक्त और भारत रत्न चन्द्र शेखर वेंकट रमण ने, कहा जा सकता है की स्वाभिमानी चन्द्र शेखर वेंकट रमण जैसे स्वाभिमानी  राष्ट्र प्रेमी को दुनियां की कोई भी ताकत कभी गुलामी की बेड़ियाँ में नहीं जकड  पाई है, अन्यथा जिसका स्वाभिमान मर चुका हो, जिसके दिल से राष्ट्र भक्ति का जज्बा ख़त्म हो चुका हो वह व्यक्ति स्वछंद होकर भी इस स्वछंदता का अहसास नहीं कर पाता है........
आजादी से लगभग सत्रह वर्ष पूर्व (1930) भौतिकी का नोबेल पुरूस्कार समारोह में कोंवोकेशन  गाउन  (चोगा ) और हैट (टोपी) पहनने से इनकार करने वाले महान वैज्ञानिक, राष्ट्र भक्त और स्वाभिमानी भारत रत्न चन्द्र शेखर वेंकट रमण को  सदैव भारतीय  संस्कृति एवं भारतीयता से लगाव रहा, अंग्रेजी साम्राज्य के अधीन होने के बावजूद भी उन्होंने अपनी भारतीय पहिचान कायम रखी और भारतीय परिधान (साफा) पगड़ी पहनकर नोबेल पुरूस्कार समारोह में शामिल हुए, उसके बाद  2 अप्रैल 2010  में भोपाल स्थित भारतीय  वन प्रबंधन संसथान में आयोजित दीक्षांत समारोह में तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने यह कह  कर गाउन पहनने से इनकार कर दिया था की "मुझे अभी तक यह समझ में नहीं आता की भारत की आजादी के छह दशक  से भी अधिक समय गुजर जाने के पश्चात भी हम क्यों इन औपनिवेशिक अवशेषों से चिपके हुए हैं ? गाउन  और हैट से जुडी हुई एक और घटना 12 जनवरी  2012 की है जब त्रिपुरा  के मुख्यमंत्री  मणिक सरकार ने त्रिपुरा केन्द्रीय विश्वविद्यालय के नौवे दीक्षांत समारोह के दौरान औपनिवेशिक परम्परा का प्रतिक गाउन  पहनने से इनकार कर दिया परिणाम स्वरूप उस दीक्षांत समारोह दौरान मुख्यमंत्री  मणिक सरकार सफ़ेद कुरता-पैजामा पहने हुए नजर आये जबकि शेष आमंत्रित अथिति गुलामी का  प्रतीक गाउन और हैट पहने हुए नजर आये, कुछ समय पहले बाबा साहब  भीम राव  अम्बेडकर विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में पूर्व राष्ट्रपति ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था की   "गाउन को  दीक्षांत समारोह से बहार किया जाना चाहिए, क्योंकि यह ब्रिटिश परम्परा का प्रतिक है, इसे पहनने से असहजता महसूस होती है, वर्तमान राष्ट्रपति चुनाव के दौरान राष्ट्रपति उम्मीदवार हेतु देशभर की जनता खासकर  युवाओं का ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम को मिला व्यापक समर्थन शायद उनकी  सादगी, उनका स्वाभिमान और भारतीय परम्पराओं के प्रति उनकी गहरी आस्था का ही एक परिणाम था,
बहरहाल दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' में छपी एक खबर के अनुसार राष्ट्रपति भवन ने बिहार के दरभंगा जिले  में  स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के आमंत्रण पत्र में से राष्ट्रपति  के नाम से पहले महामहीम  शब्द को हटाने का निर्देश जारी किया है, स्वयं राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के अनुसार   "महामहिम" शब्द औपनिवेशिक  भावना को प्रकट करता है," राष्ट्रपति भवन के निर्देशानुसार अब नये आमंत्रण पत्र  छपवाए जायेंगे जिनमें महामहीम की जगह "श्री" अर्थात श्री प्रणव मुखर्जी लिखा  होगा, निसंदेह सम्पूर्ण आजादी अर्थात आजादी का स्वदेशीकरण की दिशा में राष्ट्रपति भवन अथवा प्रणव मुखर्जी द्वारा लिया गया यह एक स्वागत योग्य कदम है, किन्तु स्मरण रहे की यह कदम सम्पूर्ण  आजादी अथवा आजादी के स्वदेशीकरण की श्रंखला की मात्र एक कड़ी है ................. 



10 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा! सम्पूर्ण आजादी के लिए तो अभी और पापड़ बेलने होंगे...साथक पोस्ट..

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  2. राष्ट्रपति की पहल एक सराहनीय कदम है।

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  5. बहुत अच्छा लिखा है आपने.

    सुझाव - पराग्रफ प्रोपरली सेट रखिये, राईट साइड में लाइन्स आगे पीछे होने से पैराग्राफ का अलाईन्मेंट सेट नहीं दिखता. फुल स्टॉप की कमी खलती है . आशा है बुरा नहीं मानेगे .

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    1. आपका सुझाव स्वागत योग्य है, अमल करूँगा......आभार.

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  6. बढ़िया द्रष्टान्त दिए हैं आपने ! शुभकामनायें आपको !

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  7. बहुत बढ़िया सार्थक चिंतन ..मनन ...

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  8. सार्थक चिंतन..बहुत सुन्दर..

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