मंगलवार, 23 मार्च 2010

बहुत कठिन है डगर संसद की .........




 बहुत कठिन है डगर संसद की ......... जी हाँ / कम से कम शब्दों में यदि कहना पड़े तो मैं  यही कहूँगा बाबा राम देव  जी से l    निसंदेह बाबा जी की अब तक की उपलब्धियों की जितनी प्रशंसा  की जाय उतनी कम है,किन्तु पिछले कुछ महीनों से प्रसारण  एवं समाचार पत्रों के माध्यम से जो ख़बरें आ रही हैं  उनके अनुसार भारत स्वाभिमान संगठन (पतंजलि योग विद्यापीठ ) के तत्वाधान में बाबा जी ने देश को स्वच्छ प्रशासन एवं मजबूत नेत्रत्व   देने हेतु एक नई राजनैतिक पार्टी का गठन करने की घोषणा कर दी है , हालाँकि अभी  पार्टी की घोषणा होनी शेष है फिर भी बाबाजी द्वारा की गई उक्त घोषणा से  राजनैतिक क्षेत्र में कोई खास  प्रतिक्रिया  या सुगबुगाहट सुनने की नहीं मिल रही है, हाँ प्रसारण  माध्यमों, समाचार पत्रों एवं देश की प्रबुद्ध जनता  ने अपने- अपने अंदाज में कयाश लगाने आरंभ  कर दिए हैं, बाबा जी की इस घोषणा को कोई हास्यास्पद बता रहा है तो कोई स्वागत योग्य , किसी को आशंका है तो कोई आश्वस्त   भी, कुल मिलाकर एक मिली-जुली प्रतिक्रिया कही जा सकती है l 
बहरहाल ! तपते हुए रेगिस्तान के उपर बादल का एक छोटा सा कतरा भी उम्मीद कि किरण नजर आता है, आज  देश में चतुर्दिक महंगाई, बेरोजगारी, भुखमरी ,असमानता एवं भ्रष्टाचार का बोलबाला है , अशिक्षित ,भूखी एवं अधनंगी जनता के सामने लुभावने  किन्तु झूठे आंकड़े  परोसे जा रहे हैं, जनता को बताया जा रहा है कि देश एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है, हमारी अर्थब्यस्था दुनियां के शीर्ष अर्थब्यस्था से प्रतिस्पर्धा करने लगी है, देश सुरक्षित है, हम सुरक्षित हैं, विकास  दर में लगातार सुधार हो  रहा है, प्रतिब्यक्ति  आय में इजाफा हो रहा है ,मुद्रा स्फीति की दर में लगातार गिरावट जारी है , इन सब के बावजूद हमें यह नहीं भूलना चाहिए की जनता के सामने जो आंकड़े प्रस्तुत किये जा रहें हैं वो महज कागजों या फाइलों तक ही सिमित  हैं यथार्थ की धरातल पर कुछ और  ही नजर आता है l
देश जब इन हालातों से गुजर रहा है तब ऐसे में बाबा जी का कहना  की हम बदलेंगे  इन हालातों को.......सुनकर एक  सुखद आश्चर्य  होता है,   हालाँकि सिर्फ जनसंख्या  ही नहीं अपितु क्षेत्रफल के आधार पर भी एक विशाल देश भारत में जहाँ पर कहा जाता है "कोस  -कोस  पर बदले पाणी , चार कोस  पर बाणी " अर्थात २८ राज्यों का एक समूह भारत जिसकी प्रत्येक राज्य की अपनी एक  अलग परम्परा ,एक अलग संस्कृति , अलग-अलग  भाषा एवं बोलियाँ हैं , प्रत्येक राज्य की अपनी अलग- अलग वेश-भूषा है, इन तमाम बिविधताओं के बावजूद भी बाबा जी समूचे देश में एक साथ 
ब्यवस्था परिवर्तन की बात करते हैं तो आश्चर्य का होना लाजमी है और सुखद भी......
बहरहाल ! भ्रष्टाचार  एवं भयमुक्त , खुशहाल भारत का जो सपना बाबा जी देख रहे हैं मैं तहे दिल से सम्मान करता हूँ उन सपनों का और कद्र करता हूँ बाबा जी के जज्बातों की ,किन्तु जैसा की एक चिनी कहावत है की "Journey  Of  A Thousand  Miles, Begin  With  A Single  Step " अर्थात इतने ब्यापक स्तर पर ब्यवस्था परिवर्तन यदि असंभव नहीं है तो आसान भी नहीं है l
जहां तक मैं समझता हूँ बेहतर होता यदि  ब्यवस्था परिवर्तन  हेतु इस आन्दोलन को इतना ब्यापक रूप न देकर एक "single step " अर्थात २८ राज्यों के इस समूह में  से किसी  एक राज्य को  इस कार्य हेतु चुन लिया  जाय, जाहिर है उतराखंड बाबा जी  की कर्मभूमि रही है सो अपने इस नेक कार्य का शुभारम्भ  बाबा जी उत्तराखंड से ही करते तो अच्छा  होता , पहले आप एक छोटे से राज्य को  आदर्श के रूप में  स्थापित करके देख लेते , प्रयोग के तौर  पर ही सही  एक छोटे से राज्य कि सफलता या असफलता के आधार पर ही आगे कि रणनीति  तैयार कि जाय तो काम आसान हो जायेगा और सफलता भी सुनिश्चित होगी............


5 टिप्‍पणियां:

  1. 'पहले आप एक छोटे से राज्य को आदर्श के रूप में स्थापित करके देख लेते , प्रयोग के तौर पर ही सही एक छोटे से राज्य कि सफलता या असफलता के आधार पर ही आगे कि रणनीति तैयार कि जाय तो काम आसान हो जायेगा और सफलता भी सुनिश्चित होगी'
    - उचित सुझाव.

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  2. बहुत बढ़िया लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! उम्दा प्रस्तुती!

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  3. Aapne bilkul sahi kaha ki baba ji ko uttarakhand se he rajniti mein padarpan karna chahiye....Kyoki suruwat chhote-chhote kadamon se hi honi chahiye..
    hamare desh ki vastavik tasveer bhi aapne bakhubi prastut ki hai....
    Bahut Shubhkamnayne.

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