मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

कर्मठ एवं द्रढ़ इच्छाशक्ति के धनी अब्राहम लिंकन.........





अब्राहम लिंकन इक्यावन वर्ष की आयु में अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे , जीवन काल  की इस लम्बी अवधि में अब्राहम लिकंन  के हिस्से में सफलताएँ कम और असफलताएं अधिक आई  , लेकिन लिंकन ने कभी भी इस
बात की परवाह  नहीं की कि लोग उनकी असफलताओं के बारे में क्या कह रहे हैं ? इक्यावन वर्ष की उम्र में जब अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए तब भी लोगों ने उनकी असफलताओं का बखान करना नहीं छोड़ा , लेकिन इस बार लिंकन ने अपने आलोचकों का मुह तोड़ जवाब देते हुए कहा था की " कोई भी ब्यक्ति पूर्णत: राष्ट्रपति बनने के योग्यं नहीं होता है, फिर भी किसी न किसी को  तो राष्ट्रपति बनना ही होगा "
आखिर लिंकन को क्यों कहना पड़ा की कोई भी ब्यक्ति पूर्णत:  राष्ट्रपति बनने के योग्यं नहीं होता है ? जी हाँ ! स्वयं लिंकन ही इस सवाल का जवाब जानते थे ऐसा नहीं था बल्कि हम सभी भी इस सवाल का जवाब  जानते हैं . जब उनकी उम्र 22 वर्ष की थी तब उन्हें ब्यापार में भारी असफलता का मुह देखना पड़ा था और
जब उनकी उम्र 23 वर्ष की थी राजनीती में कदम रखते हुए बिधायक  हेतु चुनाव लड़ा और हार गए ,
और
जब उनकी उम्र 24 वर्ष की थी तब एक बार पुन: ब्यापार में असफल हो गए और
जब उनकी उम्र 26 वर्ष की थी तब उनकी पत्नी का देहांत हो गया अर्थात गृहस्थ जीवन की एक बड़ी हार थी लिंकन के लिए,  और
 जब अब्राहम  लिंकन की उम्र 27 वर्ष की थी तब उनका नर्वस ब्रेक डाउन हो गया  एक बार फिर लिंकन को स्वाथ्य धोखा दे गया था तब भी  लिंकन ने स्वयं को टूटने नहीं दिया और
जब उनकी उम्र 29 वर्ष की थी तब एक बार फिर उन्हें असफलता का स्वाद चखना पड़ा इस बार लिंकन स्पीकर का चुनाव हार गए थे और
जब  उनकी उम्र 31 वर्ष की थी तब एक और हार उनकी झोली मे आई इस बार लिंकन इलेक्टर  का चुनाव हारे थे ,
लेकिन लिंकन ने स्वयं कभी हार नहीं मानी और एक बार लिंकन फिर चुनाव मैदान में थे और एक बार फिर हार का सामना उन्हें करना पड़ा इस बार लिंकन अमेरिकी  कांग्रेस का चुनाव हार गए , इतना ही नहीं एक बार फिर लिंकन अमेरिकी कांग्रेस का चुनाव हार गए इस बार उनकी उम्र थी 39 वर्ष , और
जब लिंकन की उम्र 46  वर्ष  कि  थी  तब  एक  बार   फिर असफलता ने उन्हें तोडने का असफल प्रयास किया    और लिंकन सीनेट का चुनाव हार गए लेकिन लिंकन  नहीं टूटे, क्योंकि एक और हार लिंकन के खाते में आनी बांकी थी तब  उनकी उम्र  थी 47 वर्ष और उप राष्ट्रपति के चुनाव में  एक और हार , किन्तु  लिंकन जैसे कर्मयोद्धा इन छोटी-मोटी असफलताओं से कहाँ विचलित होते हैं ?  हालाँकि इसके बाद भी उनकी असफलताओं का दौर  ख़त्म नहीं हुआ था  लिंकन एक बार फिर जीवन काल के 49 वें  वर्ष  की आयु  में अमेरिकी  सीनेट के चुनाव में हार गए , उम्र के लिहाज से भी अब लिंकन को हार मान लेनी चाहिए थी लेकिन लिंकन हार मानने वालों  में नहीं थे,  किसी ने ठीक ही कहा है  की "रात की तीरगी से न मायूस हो , रौशनी का सितारा नजर आएगा " कर्मठ एवं द्रढ़ इच्छाशक्ति के धनी अब्राहम लिंकन सही मायनो में कभी हारे ही नहीं  तभी तो 51 वे वर्ष की आयु में अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे.   
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 ( image and some information taken from google but edited by me )


                                  


15 टिप्‍पणियां:

  1. bahut inspiring tarike se aapne vyakt kiya hai aapne... sunder

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  2. "रात की तीरगी से न मायूस हो , रौशनी का सितारा नजर आएगा " कर्मठ एवं द्रढ़ इच्छाशक्ति के धनी अब्राहम लिंकन सही मायनो में कभी हारे ही नहीं तभी तो 51 वे वर्ष की आयु में अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे. ..
    ...Raston mein aane wale kanthon ke jo parwah na karte rahte hai tatha apne kaam mein lagi rahte hain we kabhi n kabhi mukaam haasil kar lete hai... कर्मठ एवं द्रढ़ इच्छाशक्ति se sab sambhav hai.. yahi अब्राहम लिंकन ke jiwan se seekha ja sakta hai...
    Prerak post ke liye aabhar

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  3. Pehle kaee baar angrezi mein padhne ke bawajood ek nayepan ka ahsaas hua!
    Badhai!

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  4. महान व्यक्ति छोटी उम्र में ही बड़े काम कर जाते हैं. आदिशंकराचार्य ने ३५ वर्ष की आयु में ही भारतवर्ष को एक करने का काम कर दिया था.

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  5. great history kuch kaho abraham linckon mahan yodha the, hai aur rahenge duniya ki najaro me wo nhi h pr wo such mayno me hamesha rahenge

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