शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

......... थैले पोलीथिन के



Image from Goooogle


एक आदर्श नागरिक होने का मेरा भ्रम उस बखत टूट गया जब मेरे मांगने पर एक सब्जी वाले ने छुपते-छुपाते पोलीथिन का थैला दे दिया  और साथ में अपनी मज़बूरी को ब्यक्त करता हुवा एक नशीहत भी...........................
"बाबू  जी छुपा के ले जाना , सरकार  ने इन थैलों पर प्रतिबन्ध लगा रखा है , क्या करें ? लोग मानते ही नहीं .........."
मैं अत्यधिक शर्मिंदा हुआ , अर्थात मैं भी उन लोगों में शामिल हूँ जो प्रतिबन्ध के बावजूद भी इन थैलों का उपयोग कर रहें हैं  और दूसरों को भी  प्रेरित  कर रहें हैं , हालाँकि सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़  में प्रशासन   ने इन थैलों पर प्रतिबन्ध लगा रखा  है  बावजूद इसके  सभी लोग  बेख़ौफ़  होकर इन थैलों का उपयोग कर रहे हैं  , प्रशासन के कायदे-कानून और उसके द्वारा लगाये  गए प्रतिबंधों की अवहेलना करना एक आदर्श नागरिक को शोभा नहीं  देता है .
हलकी सी वर्षा  होती है और हमारा ड्रेनेज सिस्टम फेल हो जाता है, गली, मोहल्लों  और सड़कों में बाड़ की सी हालत पैदा  हो जाती है और  हम उतर पड़ते हैं सड़कों पर प्रशासन को घेरने हेतु , हालाँकि इन हालातों के लिए सिर्फ पोलीथिन के थैलों को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है लेकिन विभिन्न  आकार-प्रकार के शीतल पेय की  बोतलें  भी इन हालातों के लिए पूर्णत: जिम्मेदार हैं , इस  ओर भी  प्रशासन को ध्यान  देना होगा .
हम लोग रसोई का अवशेष , फल एवं  सब्जी के छिलके , बचा- खुचा एवं बासी खाद्य पदार्थों  को इन थैलों में भर कर सार्वजानिक कूड़े दानो या फिर खुले में फैंक  देते हैं जो की पशुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं ओर वे जानवर   खाद्य पदार्थों सहित इन थैलों को खा जाते हैं नतीजतन एक दर्दनाक मौत को प्राप्त  होते हैं .
हालाँकि रंगहीन पोलीथिन रंगीन पोलीथिन  के मुकाबले कम हानिकारक होते हैं ,
कभी न मिटने वाले इस पोलीथिन को यदि जमीन में  गाड़ भी  दिया जाय  तो यह  न केवल  भूमिगत जल को प्रदूषित करता है बल्कि  अपने आस-पास की भूमि की उर्वरा शक्ति  को भी नष्ट का देता है , 
और यदि इसे जला दिया जाय तो इससे निकलने वाली जहरीली गैसें  न केवल  हमारी सेहत के लिए हानिकारक होते हैं  अपितु पर्यावरण को भी भारी  नुकसान पहुंचते हैं.
अर्थात हम सुब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं , और  धड़ल्ले से इसका उपयोग कर रहें .

एक पाकिस्तानी शायर ने बहुत ही हल्के-फुल्के शब्दों में शायद अनजाने में ही कितनी बड़ी बात कह दी.....


न आशियाने रहेंगे, न रहेंगे ये तिनके,
रहेंगे तो बस दुनिया में, थैले पोलीथिन के .........





    

12 टिप्‍पणियां:

  1. Wonderful post !

    We must discourage the use of polythene. It's indeed harmful for environment and animals.

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  2. मैं अत्यधिक शर्मिंदा हुआ , अर्थात मैं भी उन लोगों में शामिल हूँ जो प्रतिबन्ध के बावजूद भी इन थैलों का उपयोग कर रहें हैं और दूसरों को भी प्रेरित कर रहें हैं ,
    - यह अपराध बोध सभी नागरिकों में होना चाहिए. अपनी थोड़ी सी सुविधा के लिए हम प्रशासन द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों को भी अपना समर्थन नहीं देते.

    वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें तो टिप्पणीकारों को सुविधा होगी.

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  3. कभी न मिटने वाले इस पोलीथिन को यदि जमीन में गाड़ भी दिया जाय तो यह न केवल भूमिगत जल को प्रदूषित करता है बल्कि अपने आस-पास की भूमि की उर्वरा शक्ति को भी नष्ट का देता है ,
    और यदि इसे जला दिया जाय तो इससे निकलने वाली जहरीली गैसें न केवल हमारी सेहत के लिए हानिकारक होते हैं अपितु पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचते हैं.
    अर्थात हम सुब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं , और धड़ल्ले से इसका उपयोग कर रहें हैं

    अपने बिल्कुल सच कहा है। प्लास्टिक सच में एक त्राासदी बनता जा रहा है संपूर्ण विश्व के लिए।

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  4. Vastav mein sabse pahle apne se hi surwaat kee jay to sudhar aur auron ko nasihat dene se kaam aasan ho jata hai, aur log der sabre anusaran karte hai...
    Saarthak aur jan jagarti bhari post ke liye aabhar..

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  5. आपने बहुत सही लिखा है। पॉलीथीन एक अभिशाप बनते जा रहे हैं। हम इसकी सुविधा के इतने आदी हो गए हैं कि इसे छोड़ने को तैयार नहीं हैं। मैं भी इस अभिशाप के बारे में लिख चुकी हूँ।
    घुघूती बासूती

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  6. भाकुनी जी, विचारणीय बात कही है आपने. विचार कर्म का पहला कदम है. इस विषय में जितना हुआ है उससे कहीं अधिक करने की आवश्यकता है.

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  7. आपने बहुत सुन्दर लिखा है जो काबिले तारीफ़ है! बहुत बढ़िया लगा!

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  8. Respected (Ghuguti Basuti )Mired Mirage evm Smatr Indian (Sharma ji )nischit tour pr mera manobal badha hai aapke is blog pe aaney se, blog pe aaney hetu aapka bahut-bahut dhanyvad,se ..thanks again.

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  9. अंतराल अधिक हो गया है. अगली पोस्ट की प्रतीक्षा है.

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  10. आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया! आपके कहने के मुताबिक मैंने आखरी लाइन को बदल दिया है! अब सही लग रहा है!

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