रविवार, 17 जनवरी 2010

पोस्टमार्टम जारी है

कमेन्ट ! अर्थात टिपणी / जी हाँ लोकतंत्र की आड़ मे इस कमेंट्स रूपी शब्द का पोस्ट- मार्टम ! सफलता के लिए दुआ करें !
पोस्ट-मार्टम के दौरान यह तथ्य सामने आया है की सिक्के की भांति कमेंट्स के भी दो पहलु होते हैं , जहाँ महज एक कमेंट्स हमें बर्बाद करने की क्षमता रखता है, वही दूसरी ओर एक ही कमेंट्स काफी है हमारी जिंदिगी का रुख मोड़ने के लिए I कमेंट्स यदि हमारे पक्ष में हो तो हम ख़ुशी से झूम उठते है , और एक विजेता की भांति सीना फुलाए हम अपने दोस्तों को भी उकसाते है की जरा पड़ो तो सही ! बहुत अच्छी कमेंट्स है, और यदि कमेंट्स हमारे पक्ष मैं नहीं है , हमें लगता है की कमेंट्स हमारे "स्वाभिमान" को ठेस पहुंचा रहा है तो हम उस कमेन्ट को जड़ से मिटाने मे देर नहीं करते हैं और कमेंट्स प्रस्तुत करने वाले के प्रति हमारी विचारधारा भी रंग बदलने लगती है , उम्मीद के विपरीत कमेंट्स बिन बुलाए मेहमान की भांति खटकने लगता है I
सम्मानित पाठकगण ! जीवन के हर क्षेत्र में कमेंट्स रूपी बादलों का बरसना जारी है, भिन्न भिन्न क्षेत्रो में कमेंट्स रूपी बोछारो का रूप-स्वरूप भी भिन्न भिन्न होता है, जहाँ एक ओर राजनेतिक क्षेत्र में अधिकांश कमेंट्स आप के प्रतिद्वंदी की ओर से दागे जाते है जाहिर है वो सारे कमेंट्स आपके विरुद्ध ही होएँगे , इस तरह के कमेंट्स आपके राजनितिक छवि को धूमिल कर सकते है या फिर आपके राजनितिक भविष्य पर ही प्रश्नचिन्ह जड़ देते है वही दूसरी ओर साहित्य जगत के कमेंट्स अत्यधिक रोचक और अधिकांश आपके पक्ष में होते है , कभी-कभी तो ये कमेंट्स इतने रोचक एवं पठनीय होते है की मूल रचना को ही हासिये पर धकेल देते है बस मूल लेखक का स्तर बरकरार रह जाता है इ वास्तव में किसी लेखक के लिए यह कमेंट्स जीवनदायनी औषधि से कम नहीं है , क्योंकि इस तरह के कमेंट्स भावनाओ एवं सवेंदनाओ की चासनी में डुबो कर शालीनता से पेश किये जाते हैं, और साथ में होता है " कुछ लेने के लिए कुछ देना भी पड़ेगा " रूपी चटपटा अचार I वास्तव में ये कमेंट्स आपकी लोकप्रियता में चार चाँद जड़ देते है ओर सहायक होते हैं आपकी लोकप्रियता के विस्तारण में I
जागरूक एवं सम्मानित पठाकगण ! सिर्फ राजनितिक ओर साहित्यिक जगत में ही नहीं वरन हमारी रोज की दिनचर्या में भी कमेंट्स की बोछार होती रहती हैं , लेकिन हमारी दिनचर्या हमारी जिंदगी को ये कमेंट्स किस हद तक प्रभावित करते हैं यह निर्भर करता है कमेंट्स की गुणवतता पर, कमेंट्स की भाषाशेली पर ,ओर निर्भर करता है कमेंट्स के गोले दागने वाले व्यक्ति पर, जाने अनजाने में कमेंट्स, जान बुझ कर कमेंट्स, अनचाहे कमेंट्स ,गलती से कमेंट्स , अपनों से कमेंट्स, बेगानों से कमेंट्स I
जी हाँ ! शिक्षित एवं बेरोजगार बेटे पर माँ-बाप के कमेंट्स, शराबी और निकम्मे पति पर कमाऊ पत्नी के कमेंट्स , आधुनिक एवं शिक्षित बहु पर रुढीवादी सास के कमेंट्स , राह चलती अकेली लड़की को सड़क छाप मजनू के कमेंट्स , पडोसी पर पडोसी के कमेंट्स, इतना ही नहीं - मै भी , आप भी , ओर वो भी मजबूर हैं सभी कमेंट्स रुपी बोछारों को झेलने के लिए , वास्तव में ये कमेंट्स हम सब की जिंदिगी को नरक बना सकते हैं, हम सब को हतोत्साहित कर सकते हैं , हमें अपनी राह बदलने को मजबूर भी कर सकते हैं ये कमेंट्स , कभी कभी तो आम जिंदिगी के ये कमेंट्स हमें मजबूर कर देते हैं आत्महत्या के लिए I
सम्मानित पाठकगण ! दागिए ! दागिए ! आप भी दागिए कमेंट्स के गोले, किन्तु शालीनता की तोप से , क्योंकि आप के द्वारा दागा गया कमेंट्स का गोला महज एक कमेंट्स नहीं अपितु आइना है आप के व्यक्तित्व का ..........
फिलहाल मेरी ओर से नो कमेंट्स ! और आपकी ओर से ..................

3 टिप्‍पणियां:

  1. अगर सकारात्मक सोच की बात करें तो कमेंट्स और लेखन का चोली दामन का सांथ है आलोचक के बिना लेखक का अस्तित्व फीका पढ़ जाता है । लेख एक मन्:स्थिती में लिखा जाता है और दूसरी मन्:स्थिती में आलोचक द्वारा पढा़ जाता है । यही बात जिंदगी के दूसरे पहलुओं पर भी लागू होती है कोई नकारात्मक आलोचना से सकारात्मकता निकाल कर आघे बढ़ चलते हैं और कोई सकारात्मक आलोचना में भी नकारात्मकता ढूंढ ही डालते हैं ।
    फिर भी जिंदगी में आघे बढ़ना है तो जरूरी है:-
    मेरी बात के माने दो
    मेरी बात के माने दो
    जो अच्छा लगे उसे अपना लो
    जो बुरा लगे उसे जाने दो ।

    क्योंकी बिना कमेंट्स के सब बेकार है ।

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  2. और होई एक बात और
    बेडू़ पाको.........मेरी छैला गीतक रचनाकार स्व0 श्री ब्रिजेन्द्र लाल साह जी छन ।

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  3. अगर सकारात्मक सोच की बात करें तो कमेंट्स और लेखन का चोली दामन का सांथ है ...........bilkul sahi kaha aapne,
    or
    बेडू़ पाको.........मेरी छैला गीतक रचनाकार स्व0 श्री ब्रिजेन्द्र लाल साह जी छन । is jankari ke liye bahut-bahut dhanyavad aapka.....kahani guluband abhi jari hai, aapki pratikirya or margdarshan chahunga...

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